CM नीतीश कुमार द्वारा दलितों के हक में लिए गए फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर उड़ रहा है मज़ाक

CM नीतीश कुमार द्वारा दलितों के हक में लिए गए फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर उड़ रहा है मज़ाक

न्यूज़4बिहार:-उच्च अधिकारियों के साथ बीते शुक्रवार को हुये एक बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलितों के हक में जल्द से जल्द एक नियम बनाने को कहा जिसके तहत दलितों के हत्या होने पर परिवार के ही किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी हालांकि बिहार की आम जनमानस का नीतीश सरकार पर आरोप है कि दलितों के वोट पाने के लिए नीतीश कुमार ने अधिकारियों से ऐसा नियम बनाने के लिए बोला है। नीतीश कुमार के इस फैसले से विपक्ष को एक चुनावी मुद्दा मिल गया है जिसको लेकर विपक्षी पार्टिया नीतीश सरकार को घेरने में लगी हुई है।

 

नीतीश कुमार के इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग उड़ा रहे हैं मजाक

बता दें कि दलितों के हत्या होने पर परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जायेगी, मुख्यमंत्री के इस फैसले से सोशल यूजर्स खूब मजा ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर कोई लिख रहा है कि

“बिहार में बहार है हत्या हो जाने पर ही रोजगार है हर डिग्री बेकार है क्योंकि बिहार में सुशासन की सरकार है” तो कोई यूजर्स लिख रहा है कि

 “हर पढ़ा लिखा गुणवान व्यक्ति बेकार है क्योंकि हत्या होने के बाद ही रोजगार है क्योंकि बिहार में नीतीशे कुमार” सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर ऐसे-ऐसे सैकड़ों-हज़ारों रोजाना पोस्ट हो रहे हैं।

बिहार की जनता भी नीतीश सरकार पर सवाल उठा रही है कि जब हत्या हो जाने के बाद ही सरकारी नौकरी मिलेगी तो पढ़ने-लिखने की क्या जरूरत है। नीतीश कुमार के इस फैसले को लेकर लोग इतने आक्रोशित है कि लोग यहां तक कहने में नही कतरा रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हत्या एवं लूटपाट को बढ़ावा देना चाहते हैं। तभी तो ऐसा विवेकहीन फैसला ले रहे हैं।

नीतीश सरकार द्वारा कहा गया कि दलितों के उथान के लिए यह फैसला लिया गया है है

नीतीश सरकार कथित तौर पर यह कह रही है कि यह फैसला दलितों के उथान के लिए लिया गया है लेकिन बिहार की जनता इसे सिरे से नकार रही है। बिहार की आम जनता की नीतीश सरकार से कई सारी सवाल है जैसे कि

1. दलितों के उथान के लिए यह फैसला लिया गया तो यह फैसला नीतीश सरकार की पहली सरकार बनते वक्त क्यों नहीं लिया गया। क्यू उस समय दलितों के उथान का विचार नीतीश सरकार के मन में नही आया था।

2. नीतीश सरकार द्वारा केवल दलितों के लिए ही ऐसा फैसला क्यों लिया गया क्या अन्य किसी जाति विशेष में गरीब और सताय हुए लोग नही है। दूसरे जाति में भी ऐसे-ऐसे लोग हैं जिनको रोजाना खाने तक को नसीब नहीं होती है।

3. क्या नीतीश सरकार का यह फैसला बिहार में हत्या और लूटपाट जैसी समस्याओं को बढ़वा नही देगी।

4. जब हत्या होने के बाद ही सरकारी नौकरी मिलेगी तो पढ़ने-लिखने की क्या जरूरत है तब तो वह सारे लोग बेकार घूमेंगे जो बड़े-बड़े डिग्री लेकर सरकारी नौकरी के तलाश में है।

5. नीतीश सरकार को दलितों के उथान के लिए इतना ही चिंता है तो जो दलित आर्थिक रूप से कमजोर है उनके लिए विशेष तौर पर बढ़िया स्कूल की व्यवस्था, सरकारी अस्पताल में इनलोगों के लिए बढ़िया स्वास्थ्य की व्यवस्था, जन-वितरण प्रणाली के तहत उत्तम राशन की व्यवस्था, इनलोगों के घर बनवाने के लिए सरकार को कोई बढ़िया एवं कारगर उपाय सोचना चाहिए न कि हत्या हो जाने के बाद सरकारी नौकरी वाले फैसले पर अड़ा रहना चाहिए। नीतीश सरकार की बिहार के आम जनता के प्रति यही नीति रही तो आनेवाले बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की गद्दी छीनने से कोई नहीं रोक पायेगा।

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