अबला नहीं शक्ति का नाम नारी है!

 

       अबला नहीं शक्ति का नाम नारी है!

-:डॉ अलोक बारी:-

आज अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस है। प्रति वर्ष 23जून को जागरुकता दिवस के रुप में यह मनाया जाताहै।

 

विधवाओं के खिलाफ अत्याचार और उनके के साथ बरती जा रही अमानवीय व्यवहार जो किसी भी सभ्य देश के लिए कलंक है, शोचनीय व गंभीर विषय है।ऐसी महिलाओं के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार व सामाजिक मुख्य धारा में लाने के उद्देश्य से पहली बार 23जून2011 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की, उसी समय से इस तिथि को यह दिवस मनाने की परिपाटी शुरु हुई।

 

पिछले सात वर्षों में बिट्रेन की लूम्बा फाउंडेशन नामक स्वयंसेवी संस्था ने विधवाओं के माली हालात पर मुखर हुआ, जनजागृति चलाया;इसी के प्रयास से विधवा दिवस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया।

भारत में विधवाओं के संरक्षण के लिये बिन्देश्वर पाठक (सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक) ने एक विधेयक का मासौदा भी तैयार किया है।

इस संदर्भ में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग12करोड़ विधवायें निवास करती हैं, भारत में ही लगभग 4करोड़ हैं, वृन्दावन में लगभग 15000निवासित हैं।

आज इन महिलाओं में बहुसंख्यक महिलायें अपमान व जिल्लत की जिंदगी जीने को अभिशप्त हैं, सामाजिक व राजनीतिक संजीदगी से ही मौलिक परिवर्तन हो सकती है, वैश्विक स्तर पर सुधार अपरिहार्य है, सम्यक पहल नितांत आवश्यक है।

✍🏻 नारी शक्ति को नमन!🌹🙏🌹

error: Content is protected !!