बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बावजूद सियासतदानों के उदासीनता है।

बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बावजूद सियासतदानों के उदासीनता है।

महलों की ऊंची अट्टालिकाएं है झोपड़ियों के आर्तनाद को कहां सुन पाती है। हुक्मरानों को सत्ता का नशा उन्हें मानवीय संवेदनाओं से परे कर देती हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति के बावजूद सियासतदानों के उदासीनता है।

 

सारण जिले के तरैया प्रखंड के कोड़र गांव में बाढ़ के कहर से पूरा गांव त्रस्त है। लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर चुका है।लोगों में भय और व्याकुलता व्याप्त है। लेकिन इस मुश्किल हालात में भी सरकारी सुविधा नदारद है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कोई भी साधन उपलब्ध नहीं है। पता नहीं क्यों सत्ताधीशों की अंतरात्मा जाग नहीं रही है।

 

मामला गंभीर है सभी तरह लोग परेशान है लेकिन कहीं किसी को सेवाएं मुहैया नहीं हो पा रही है तरैया से स्वतंत्र पत्रकार पवन कुमार “सरोज” ने बताया कि आज दिन भर हमने NDRF की टीम से मदद लेने के लिए कॉल किया मगर शाम 5:00 बजे तक कहीं कोई मदद नहीं मिला। उसके बाद हमने खुद अपने पड़ोसियों की मदद से अपने परिजनों को ऊंचे स्थान तक ले गए। उन्होंने बताया कि मेरे घर में पानी प्रवेश कर गया है मैंने सोचा कि अपने परिजनों को अपने रिश्तेदार के यहां भेज दूं इसके लिए मैंने NDRF की टीम से मदद लेना चाहा सबसे पहले हमने तरैया के सीओ को कॉल किया तो उन्होंने मेरा कॉल नहीं उठाया। कई बार कोशिश करने के बाद उनसे हमारी बात नहीं हो पाई। उसके बाद हमने बीडीओ से बात की तो उन्होंने कहा कि आप एसडीओ से बात कीजिए हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। इसके बाद उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया इसके बाद हमने अपने स्थानीय मुखिया पति कृष्ण कुमार गुप्ता से बात की तो उन्होंने मुझे एक नंबर दिया जिस पर मैंने कॉल किया तो मुझे बताया गया कि आप थाना को कॉल कीजिए वहां से NDRF की टीम भेज दी जाएगी। तब हमने तरैया थाना से बात की तो मुझे बताया गया कि थोड़ी देर में आपके पास एनडीआरएफ की टीम भेजी जा रही है। यह बात लगभग दोपहर की है। घंटो समय बीतने के बाद कहीं कोई नहीं आया। उसके बाद हमने फिर दोबारा बात की तो हमें बताया गया कि फिलहाल एनडीआरएफ की टीम कहीं गई हुई है। उधर से आने के बाद आपके पास भेजा जाएगा फिर हमने आधा घंटा बाद कॉल किया तो हमें बताया गया कि NDRF की टीम कहीं दूसरी जगह गई हुई है। तब हमने जिला अधिकारी से बात की तो जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि आपके पास जल्दी कॉल आ जाएगा उसके आधे घंटे बाद मेरे पास कॉल आया तब मुझसे मेरा पूरा पता लिया गया और कहा गया कि हम जल्द ही सीओ को सूचना दे रहे हैं आपके पास NDRF की टीम जल्द ही आ जाएगी लेकिन घंटों बीत जाने के बाद कहीं कोई खबर नहीं हुई। उसके बाद हमने फिर दोबारा इस नंबर पर कॉल किया तब उन्होंने जो कहा वह काफी निंदनीय था। उन्होंने मुझे कहा कि आप अपने घर के ऊपर लाल झंडा लगाइए और जब भी एनडीआरएफ की टीम आपके घर के आसपास दिखाई देती है तो आप जोर से चिल्लाकर मदद की गुहार लगाईए इतना सुनने के बाद हमने कॉल काट दिया। तब हमें विश्वास हो गया कि प्रशासन के द्वारा हमारी किसी प्रकार की कोई मदद नहीं की जा सकती है। उसके बाद हमने अपने पड़ोसियों से बात की और एक नाव की व्यवस्था करवाई गई जिससे के बाद नाव के सहारे हमारे परिजन तरैया तक गए।

 

बात यह नहीं है कि एनडीआरएफ की टीम नहीं पहुंची मगर बात यह है कि जिलाधिकारी के निर्देश के बाद भी एनडीआरएफ की टीम नहीं पहुंच सकी अगर किसी व्यक्ति की ज्यादा तबीयत खराब हो तो ऐसी स्थिति में शायद एनडीआरएफ की टीम हॉस्पिटल पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि पोस्टमार्टम कराने के लिए पहुंचेगी।

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