बाढ़ से जूझ रहे लोगों को शुद्ध पानी की आवश्यकता चापाकल पानी में डूब जाने के कारण पानी पीने कों तरस रहे बाढ़ पीड़ित

विपदा की घड़ी में शुद्ध पेयजल की आवश्यकता

 

 

बाढ़ से जूझ रहे लोगों को शुद्ध पानी की आवश्यकता चापाकल पानी में डूब जाने के कारण पानी पीने पर मजबूर

 

 

रिपोर्ट: चंदन कुमार “चंचल”

 

     सारण:(तरैया)- विधानसभा क्षेत्र के लौवा चकिया पिपरा सिरमी खराटी लगभग एक दर्जन से भी अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित है आपको बता दें कि 2001 का बाढ़ 2003 का बाढ़ और 2017 का बाढ़ उससे भी ज्यादा पानी 2020 का बाढ़ का है। आपको बताते चलें कि 2000 का बाढ़ जो था। उससे अधिक पानी 2020 में हैं। वही तरैया अंचल अधिकारी ने बताया कि हर परिस्थिति में हम आपके साथ हैं। कोई भी प्रॉब्लम हो तो बेहिचक हमारे पास फोन कर सकते हैं। और हर संभव मदद करने के लिए दिन रात एक कर देंगे। वही युवा नेता मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि हर परिस्थितियों में हम आपके साथ हैं। यह जो विपता की घड़ी है। इस समय एक दूसरे को मदद करने से ही होगा। वही एनडीआरएफ के टीम के राजीव रंजन ने बताया कि 24 घंटा हमलोग काम करने के लिए तैयार हैं। एनडीआरएफ ने सभी लोगों को सुरक्षित स्थान ग्रहण कराने में जुटी हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि लौवा चकिया में बाढ़ के पानी ज्यादा बढ़ जाने के कारण चापाकल जो पीने वाला पानी होता है। वह बाढ़ के पानी में डूब चुका है। जिससे पीने के लिए काफिर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोग के यही कहना है कि जो भी लोग अपने घर पर ही इस गुजर कर रहे है। उन लोगों को सरकार शुद्ध पेयजल पीने का व्यवस्था कराएं। नहीं तो इस विपदा की घड़ी में पूरे देश में करोना जैसी महामारी से लोग जूझ रहे हैं। दूसरी तरफ बाढ़, तीसरी तरफ मूलाधार बारिश, लोगों का कहना है कि 2020 में सही सलामत जीवित रह ले तो बहुत बड़ा समस्या का सामना कर लिये।

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