दो दिनों से बॉर्डर पर बाहरी लोगों के आने का सिलसिला जारी

दो दिनों से बॉर्डर पर बाहरी लोगों के आने का सिलसिला जारी

 

गुठनी (सिवान):यूपी बार्डर होकर बिहार के विभिन्न जिलों को जाने वाले लोगों के आने का सिलसिला सोमवार की शाम तक जारी रहा। यहां शनिवार की शाम से ही लोगों की आवाजाही शुरू है। सोमवार की दोपहर सारण डीआइजी विजय वर्मा, एसपी अभिनव कुमार, एसडीपीओ जितेंद्र पांडेय, एसडीओ संजीव कुमार स्थानीय थानाध्यक्ष के साथ बॉर्डर पर पहुंचे जहां उन्होंने हालात का जायजा लिया। बाहर से आने वाले लोगों से पूछताछ कर उन्हें घर भेजने की स्थिति का भी जायजा लिया। इस दौरान कितने लोगों को बिहार के विभिन्न जिलों में भेजा गया इसके बारे में किसी ने पुष्ट जानकारी नहीं दी। लेकिन सूत्रों की मानें तो दो दिनों के अंदर सिवान बॉर्डर से कम से कम तीन हजार से अधिक लोगों को उनके गृह जिला निजी बस, ट्रक व अन्य वाहनों से भेजा गया है।

गाड़ियों में बैठाने के पहले बॉर्डर के रास्ते प्रवेश करने वाले सभी लोगों से सोशल डिस्टेंस बनाने की अपील प्रशासन ने की और वहां मौजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी लोगों की स्क्रीनिग की। रजिस्टर में सभी बाहरी लोगों का नाम पता अंकित कर लिया गया है। इधर रविवार की रात बॉर्डर और गुठनी सहित जीरोदई में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में ठहरे लोगों का हाल स्थानीय विधायक सत्यदेव राम ने जाना। उन्होंने सोमवार को बॉर्डर पर अपने सौजन्य से लोगों के लिए राहत शिविर लगा खाने, पीने की व्यवस्था कराई। इससे पूर्व रविवार की रात तक बॉर्डर पर जमे तकरीबन 1500 से अधिक लोगों को एसडीओ की मौजूदगी में बसों और अन्य वाहनों से भेजा गया था। लेकिन सोमवार की अलसुबह दो बजे 100 लोग एक बस में सवार होकर पहुंच गए। इसके बाद छह बजे तक तीन अन्य गाड़ियों से कुल 600 के करीब लोग एकत्रित हो गए। दो दिनों के आंकड़ों की मानें तो यहां से सोमवार की शाम तक तीन हजार से अधिक लोग रवाना हुए बाहर से आए मजदूरों को एक बूंद भी पानी नसीब नहीं :

गुठनी के यूपी बार्डर श्रीकलपुर चेकपोस्ट पर पहुंचे लोगों को प्रशासन ने आरबीटी विद्यालय में रखा था। जहां से सोमवार की सुबह उन्हें उनके गृह जिला भेजा यगा। वहां मौजूद लोगों ने व्यवस्था पूर्ण नहीं होने का आरोप लगाया। लोगों ने मोटरयान निरीक्षक अर्चना कुमारी के समक्ष हंगामा किया।

इसके पहले सोमवार सुबह सीओ राकेश कुमार और थानाध्यक्ष मनोरंजन कुमार ने 7 बसों से लगभग 700 लोगों को उनके गृह जिला भेजा था।

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