चाणक्य नीति: धनवान बनना है तो पहले इन बातों को जान लें

चाणक्य नीति: धनवान बनना है तो पहले इन बातों को जान लें

चाणक्य नीति में कुछ ऐसी बातें बताई हैं जिन्हें जीवन में अपनाकर धनवान बना जा सकता है.

 

News4Bihar: आचार्य चाणक्य ने हर उस विषय वस्तु का गहराई से अध्ययन किया था जो समाज को प्रभावित करती है. अपने अध्ययन से उन्होंने जो संदर्भ सहित व्याख्या की उसे उन्होंने अपनी चाणक्य नीति में सम्मलित किया. चाणक्य ने

धनवान बानने के लिए व्यक्ति को कुछ नियम बताए हैं.

चाणक्य के अनुसार अगर इन नियमों को पालन करते हुए व्यक्ति अपने कर्म करता है तो उसे धन की देवी लक्ष्मी का आर्शीवाद अवश्य प्राप्त होता है.

चाणक्य के अनुसार धनवान बनने के लिए दुर्गम रास्ते पर चलने से नहीं घबराना चाहिए. चाणक्य के मुताबिक वो व्यापारी कभी धनवान नहीं बन सकता है जो सीमाओं के पार जाने से घबराता हो. इसी प्रकार मां लक्ष्मी उसी पर अपनी कृपा बरसाती हैं जो जोखिम लेने से नहीं डरता है. चाणक्य के अनुसार इन गुणों से पूर्ण व्यक्ति ही धनवान बनने का सुख भोगता है.

ज्ञान:किसी कार्य को तब नहीं किया जा सकता है जब तक की उस विषय का ज्ञान न हो. इसलिए धनवान बनने के लिए ज्ञान का होना उतना ही जरुरी है जितना कि अंधूरे को मिटाने के लिए प्रकाश का होना. ज्ञान के बिना धनवान बनने का सपना सपना ही. इसलिए ज्ञान को प्राप्त करने की भी कोशिश करते रहने चाहिए. ध्यान रहे यह एक सतत प्रक्रिया है.

साहस:धनवान बनने के लिए पहला गुण साहस है. जो व्यक्ति जोखिम लेने से बचते हैं वे कभी धनवान नहीं बन सकते हैं. जो जोखिम उठाता है और पूरे साहस के साथ डटा रहता है वही धनवान बनने का सौभाग्य प्राप्त करता है.

कु्शल प्रबंधन:किसी भी कार्य को जब तक प्रबंधन से न किया जाए तब तक उसकी सफलता में संदेह बना रहता है. धनवान बनने के लिए कार्य में कुशलता और सही प्रबंधन होना उसी प्रकार से जरुरी है जिस प्रकार से भोजन में नमक. कुशल प्रबंधन से अर्थ कार्य को योजनाबद्ध तरीके से पूर्ण करना.

दूरदर्शिता:आने वाले समय को भांव लेने की जिसमें शक्ति और प्रतिभा होती है वही अपने आप को बेहतर ढंग से स्थापित कर पाता है. धनवान बनने के लिए दूरदर्शी होनो भी एक प्रमुख गुण हैं. हवा के रुख को जो समय से पहले ही पहचान ले वह लाभ लेने से कभी वंचित नहीं रहता है.

सामंजस्यता: कोई भी कार्य अकेले पूर्ण नहीं किया जा सकता है. इसके लिए लोगों का सहयोग लेना ही पड़ता है. लोगों के श्रम और प्रतिभा का किस प्रकार से उपयोग करना है इसके लिए सामंजस्यता की समझ होना बहुत ही जरुरी है. जो इसकी समझ विकसित कर लेते हैं वही सफल होते हैं.

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