परिणय बंधन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आप सभी मित्रों से प्यार स्नेह की अपेक्षा- धर्मेन्द्र सर

 

 

 

परिणय बंधन की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आप सभी मित्रों से प्यार स्नेह की अपेक्षा- धर्मेन्द्र सर

परिणय बंधन की दूसरी वर्षगांठ। Happy Marriage Anniversary 🎂

 

विवाह एक ऐसा रिश्ता है जो खून का नहीं होता लेकिन इतना पवित्र होता है जितना कोई नहीं. सभी रिश्ते नाते के अलग मायने हैं पर पति पत्नी का रिश्ता ऐसा रिश्ता है जैसे दो जिस्म और एक जान जो सांस रुकने पर ही टूटता है।

 

शादी का रिश्ता इस दुनिया के कुछ पवित्र रिश्तों मे से एक होता है। ये जीवन को स्थाई बनाती है और इसी पढ़ाव के बाद मनुष्य अपनी ज़िम्मेदारियों को उठाता है। शादी होना किसी के भी ज़िन्दगी का एक बड़ा अवसर होता है। आप शादी का फैसला लेने के साथ साथ अपने हमसफ़र को भी चुनते हैं जिसके साथ अपनी ज़िन्दगी ख़ुशी ख़ुशी बितानी रहती है। जैसे जैसे साल शादी के साल बीतते रहते हैं, वैसे वैसे ये रिश्ता और भी मज़बूत होता चला जाता है। समय के साथ साथ अपने जीवनसाथी को हम इतनी भली-भाँती जानने लगते हैं की उनके बिना अपनी ज़िन्दगी की कल्पना करना भी मुश्किल हो जाता है।

 

पति-पत्नी के बीच का ऐसा धर्म संबंध जो कर्तव्य और पवित्रता पर आधारित हो। इस संबंध की डोर जितनी कोमल होती है, उतनी ही मजबूत भी। जिंदगी की असल सार्थकता को जानने के लिये धर्म-अध्यात्म के मार्ग पर दो साथी, सहचरों का प्रतिज्ञा बद्ध होकर आगे बढऩा ही दाम्पत्य या वैवाहिक जीवन का मकसद होता है।

 

यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर स्त्री और पुरुष दोनों ही अधूरे होते हैं। दोनों के मिलन से ही अधूरापन भरता है। दोनों की अपूर्णता जब पूर्णता में बदल जाती है तो अध्यात्म के मार्ग पर बढऩा आसान और आनंद पूर्ण हो जाता है।

 

आज इस सालगिरह के मौके पर मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करूँगा हम दोनों स्वास्थ्य एंव खुशहाल रहें।

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