शिशुओं के सर्वांगीण और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए स्तनपान जरूरी: डॉ विजय किशोर

शिशुओं के सर्वांगीण और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए स्तनपान जरूरी: डॉ विजय किशोर

• इसुआपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बोतल दूध मुक्त घोषित किया गया

 

• स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ विभाग का अनोखा पहल

 

छपरा। नवजात शिशुओं के सर्वांगीण और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए स्तनपान बहुत जरूरी है। स्तनपान का मुख्य उद्देश्य नवजात एवं शिशुओं में बेहतर पोषण को सुनिश्चित कराना है। साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर उन्हें संक्रामक रोगों के प्रति सुरक्षित करना है। उक्त बातें इसुआपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय किशोर ने कही। उन्होंने कहा कि स्तनपान से शिशुओं को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है। जन्म के 1 घंटे के भीतर शिशुओं को स्तनपान कराने से नवजात शिशु मृत्यु दर में 20% तक की कमी लाई जा सकती है वहीं छह माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया से 11% एवं निमोनिया से 15% तक मृत्यु की संभावना कम होती है।

 

अस्पताल परिसर को बोतल दूध मुक्त घोषित किया गया:

 

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विजय किशोर ने बताया इसुआपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बोतल दूध मुक्त घोषित किया गया है। अस्पताल परिसर में बच्चों को बोतल से दूध पिलाने पर पाबंदी लगा दी गई है। अस्पताल में आने वाली महिलाओं व परिजनों को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यहां पर स्तनपान कक्ष का निर्माण किया गया है। जिसमें महिलाएं अपने बच्चों को स्तनपान करा सकती हैं। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को बोतल दूध मुक्त घोषित किया जा रहा है ।इसी कड़ी में इसुआपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बोतल दूध मुक्त घोषित किया गया है।

 

बच्चों को छूने से पहले करें हाथों की सफाई:

 

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बीच 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस दौरान स्तनपान के प्रति महिलाओं को जागरुक भी किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए महिलाओं को साफ सफाई के प्रति भी विशेष रुप से जागरुक किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों द्वारा जानकारी दी जा रही है कि बच्चों को छूने या स्तनपान कराने से पहले अपने हाथों की अच्छी तरह से धुलाई कर लें। ताकि बच्चे को किसी तरह की संक्रमण ना हो सके। शिशु के 6 महीने पूरे होने के बाद उसे स्तनपान के साथ संपूरक आहार देना जरूरी है। शिशु को 2 साल तक स्तनपान जारी रखा जाना चाहिए।

 

 

नियमित स्तनपान को लेकर किया जा रहा है जागरूक:

 

जिला स्वास्थ समिति के जिला योजना समन्वयक रमेश चंद्र कुमार ने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर घर जाकर नवजात शिशु के परिजनों को नियमित और अधिकाधिक स्तनपान के फायदे के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह जानकारी दी जा रही है कि स्तनपान कराने से शिशु का समग्र शारीरिक और मानसिक विकास होता है। साथ ही उनका आईक्यू लेवल यानी उसके सोचने समझने का स्तर ऊंचा रहता है। नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध अवश्य पिलाएं। यह एंटीबॉडीज व प्रोटीन से भरपूर होता है और बीमारियों से रक्षा करता है।

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