भारतीय वायुसेना का राफेल फाइटर विमानों का इंतजार होगा खत्म, आज अंबाला में होंगे लैंड

 भारतीय वायुसेना का राफेल फाइटर विमानों का इंतजार होगा खत्म, आज अंबाला में होंगे लैंड

 

27 जुलाई को फ्रांस (France) के मेरिग्नाक बेस से 5 राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jet) भारत के लिए रवाना हुए थे. भारतीय समयानुसार करीब 12:30 बजे विमानों ने उड़ान भरी और लगातार 7 घंटे तक उड़ान भरते हुए शाम को अबूधाबी (Abu Dhabi) के करीब अल-दफ्रा फ्रेंच एयरबेस पर पहुंचे.

दिल्ली: भारत और चीन (China) के बीच लद्दाख (Ladakh) में तनातनी और तनाव लगातार जारी है. और इसी तनातनी के बीच चीन को परेशान करने वाली एक और ख़बर आ गई है. जो है भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में राफेल फाइटर विमान (Rafale Fighter Jets) के शामिल होने की. राफेल को आधिकारिक तौर पर पिछले साल ही भारत को सौंप दिया गया था लेकिन आज राफेल वास्तव में भारतीय जमीन (Indian Soil) पर लैंड करेगा.

27 जुलाई को फ्रांस (France) के मेरिग्नाक बेस से 5 राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jet) भारत के लिए रवाना हुए थे. भारतीय समयानुसार करीब 12:30 बजे विमानों ने उड़ान भरी और लगातार 7 घंटे तक उड़ान भरते हुए शाम को अबूधाबी (Abu Dhabi) के करीब अल-दफ्रा फ्रेंच एयरबेस पर पहुंचे. आज यानी 29 जुलाई को सुबह ये फाइटर अल-दफ्रा एयरबेस से अंबाला (Ambala) के लिए रवाना होंगे और मौसम अगर ठीक रहा तो दोपहर बाद किसी भी समय ये पांचों फाइटर जेट अंबाला एयरबेस (Ambala Air Base) पर लैंड करेंगे.

खुद एयर चीफ मार्शल राफेल को रिसीव करेंगे

हालांकि इस मौके पर वायुसेना की ओर से किसी आधिकारिक कार्यक्रम का ऐलान नहीं किया गया है लेकिन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया विमानों को अंबाला में रिसीव करेंगे. कोरोना काल में भी लगातार भारतीय वायुसेना ने राफेल को तैयार करने का काम जारी रखा.

बता दें 10 एयरक्राफ्ट तयशुदा समय पर डिलीवरी के लिए तैयार हैं. हालांकि पांच एयरक्राफ्ट ट्रेनिग के लिए फ्रांस में ही रखे गए हैं जबकि 5 को भारत भेजा गया है और फ्रांस की तरफ ये साफ किया जा चुका है कि बाकी फाइटर जेट की डिलीवरी 2021 के अंत तक हो जाएगी.

कुल दो स्कवाड्रन यानी 36 फाइटर जेल भारत ने फ्रांस से लिए

इससे पहले अबूधाबी के पास फ्रांस के एयरबेस तक फ्रांस वायुसेना के मिड एयर रिफ्यूलर राफेल के साथ थे. अब अबूधाबी के बाद भारतीय आईएल 78 रिफ्यूलर राफेल के साथ होंगे, जो की हवा में ही इन फाइटर जेट्स में ईंधन भरेंगे. सूत्रो के मुताबिक़ ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह राफेल स्कवाड्रन के पहले कमॉडिंग ऑफ़िसर होंगे. वो पांच अन्य पायलटों के साथ विमानो के लेकर आ रहे हैं. इन सभी पायलटों की ट्रेनिंग तकरीबन एक साल से फ्रांस में जारी थी.सूत्रों की मानें तो अभी तक कुल 15 से 17 पायलट पूरी तरह से इसे उड़ाने में ट्रेंड हो चुके हैं. 17वीं स्कवाड्रन के 18 राफेल फाइटर जेट्स के लिये करीब तीस पायलट्स की ट्रेनिंग होगी. हालांकि 150 से 200 ग्राउंड स्टाफ को राफेल के स्कवाड्रन की देख-रेख के लिए ट्रेंड किया जा चुका है. भारत तक पहुंचने के लिए राफेल को 7000 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. कुल दो स्कवाड्रन यानी 36 फाइटर भारत ने फ्रांस से लिए हैं. फिलहाल इन फाइटरों को उड़ाने और टैक्निकल-वेपन सिस्टम की पहले बैच ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है. अगले बैच की ट्रेनिंग अगले नौ महीनों तक फ्रांस में ही होगी.

पाक-चीन सीमा के किसी भी खतरे से पलक झपकते निपट सकेगा राफेल

भारतीय वायुसेना पिछले कई सालों से फाइटर स्कवाड्रन की कमी से जूझ रही थी. राफेल के आने से काफी हद तक इस कमी को पूरा किया जा सकेगा. राफेल का पहला स्कवाड्रन अंबाला और दूसरा हाशिमारा में स्थापित होगा. इस फाइटर को दुनिया के सबसे एडवांस और सबसे ख़तरनाक फाइटरों में गिना जाता है. दुनिया की सबसे ख़तरनाक हवा से हवा में मार करने वाली BVR मिटिओर मिसाइल से राफेल लैस है और पाकिस्तान और चीन सीमा के किसी भी ख़तरे से पलक झपकते निपट सकेगा.

कोरोना के चलते माना जा रहा था कि राफेल की डिलीवरी में देरी हो सकती है लेकिन जून के पहले हफ्ते में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस के सशस्त्र बल के मंत्री फ्लोरेंस के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी जिसमें फ़्रांस ने कोरोना के बावजूद फाइटरो की डिलीवरी को तयशुदा समय में ही करने का आश्वासन दिया था और उसी के तहत कोरोना काल में भी भारत में राफेल विमानों के सही समय पर आने का रास्ता साफ हुआ. गेमचेंजर हथियारों की डिलिवरी का सिलसिला शुरू हो गया है. स्कैल्प (Scalp) और मिटिओर (Meteor) मिसाइल की डिलीवरी शुरू हो गई है और इमर्जेंसी पर्चेज के तहत हैमर मिसाइल भी भारत फ्रांस से खरीद रहा है.

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