डायरिया से बचाव के लिए सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की हुई शुरूआत

• 30 जुलाई तक चलेगा विशेष अभियान

• अभियान के दौरान जिला एवं प्रखंड स्तर पर होगी मॉनिटरिंग

• घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों को ओआरएस के इस्तेमाल की देंगी जानकारी आशा।

छपरा। जिले में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने तथा बच्चों को डायरिया से बचाव के लिए सघन दस्त नियंत्रण अभियान की शुरूआत की गयी। जिले के सभी प्रखंडों इस अभियान की विधिवत शुरूआत की गयी। 15 से 30 जुलाई तक यह अभियान चलेगा। इस दौरान बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाया गया और डायरिया से बचाव की जानकारी दी गयी। सिविल सर्जन डॉ. सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि दस्त बाल मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इसे नियंत्रण करने व दस्त संबंधी कारण व इसके निदान के प्रति आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन महत्वपूर्ण है। पखवाड़ा के दौरान कम उम्र के बच्चों के बीच ओआरएस व जिक की दवा वितरित की जाएंगी।दस्त के कारण होने वाले शिशु मृत्यु के मामलों को न्यूनतम स्तर तक लाना इस पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि डायरिया से होने वाले मृत्यु का मुख्य कारण निर्जलीकरण व शरीर में इलेट्रोलाइट्स की कमी है। ओआरएस व जिक के प्रयोग से डायरिया से होने वाली मौत को टाला जा सकता है।

 

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर देंगी जानकारी:

 

सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के तहत विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय के आधार पर दस्त नियंत्रण के उपाय, दस्त की शिकायत होने पर ओआरएस व जिक दवा का प्रयोग, दस्त के दौरान उचित पोषण व समुचित इलाज के प्रति आम लोगों को जागरूक किया जाना है। आशा घर-घर जाकर ओआरएस व जिक दवा करेंगी।पखवाड़ा के दौरान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पांच साल से कम उम्र के बच्चों के बीच ओआरएस व जिक दवा का वितरण किया जायेगा। दवा के प्रयोग की विधि, इस दौरान बरती जाने वाली सावधानी, दस्त से बचाव को लेकर स्वच्छता का महत्व सहित अन्य पहलुओं को लेकर संबंधित अभिभावकों को जागरूक किया जायेगा। झुग्गी-झोपड़ी, बाढ़ प्रभावित इलाके, निर्माण कार्य में लगे मजदूर, ईंट-भट्ठा वाले क्षेत्रों में शत प्रतिशत बच्चों के बीच दवा वितरण को प्राथमिकता दिया जाना है।

 

पांच वर्ष के उम्र तक के बच्चे को किया गया है लक्षित:

 

डीआईओ डॉ. चंदेश्वर सिंह ने बताया कि दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी प्रखंडो के पांच वर्ष तक के बच्चों को लक्षित किया गया है। अभियान के तहत स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिसंवेदनशील क्षेत्र, शहरी झुग्गी-झोपड़ी, निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के परिवार, ईंट-भट्ठे के निर्माण वाला क्षेत्र, अनाथालय और ऐसे चिह्नित क्षेत्र जहां दो तीन वर्ष पूर्व तक दस्त के मामले अधिक संख्या में पाये गये हों, छोटे गांव व टोले जहां साफ सफाई और पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, ऐसी जगहों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया है। जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से अभियान की 15 दिनों तक लगातार निगरानी की जाएगी।अभियान के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस पैकेट का वितरण करना है। आशा कार्यकर्ता परिवार के सदस्यों को ओआरएस के घोल बनाने और इसके उपयोग की विधि और इसके लाभ के बारे में भी बताएंगी। परिवार के सदस्यों को साफ-सफाई और हाथ धोने के तरीकों की जानकारी भी देंगी। परिवार के सदस्य को दस्त होने के दौरान बच्चे को जिंक का उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी। जिंक का प्रयोग करने से दस्त की तीव्रता में कमी आ जाती है। दस्त ठीक नहीं होने पर गंभीर स्थिति में बच्चे को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाने की सलाह परिवार के सदस्यों को दी जाएगी।

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