कब्र भी नहीं रही आखिरी मंजिल, पुलिस ने शव निकालकर पोस्टमार्टम को भेजा।

कब्र भी नहीं रही आखिरी मंजिल, पुलिस ने शव निकालकर पोस्टमार्टम को भेजा।

रिपोर्ट: चंदन कुमार “चंचल”

यूं तो कहा जाता है कि शमशान या कब्रिस्तान ही व्यक्ति की आखिरी मंजिल होती है लेकिन सारण जिले के तरैया प्रखंड में ऐसा वाकया सामने आया है की दस दिन पूर्व दफनाए गए शव को कब्र से निकाल कर पुलिस ने अंत्यपरीक्षण के लिए भेजा।
मामला तरैया थाना के चैनपुर पंचायत के गलिमापुर गांव का है जहां के निवासी मो. शाहनवाज पत्नी की मौत विगत चार जुन को हो गई थी घर वालों द्वारा इसकी सुचना मायके पक्ष को दी गई एवं मायके पक्ष वालों की उपस्थिति में सभी गांव वाले जनाजे में शामिल हुए एवं पूरे रस्मो रिवाज के साथ शव को दफनाकर मिट्टी दिया गया।

लेकिन घटना के सिर्फ 4 दिनों बाद मृतका के भाई लकड़ी नविगंज थाना क्षेत्र के लखनौरा निवासी मो. इरशाद के द्वारा तरैया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई कि मेरी बहन की हत्या हुई है एवं दहेज में पांच लाख रुपए नगद एवं एक पैशन प्रो मोटरसाईकल नही देने के वजह से यह हत्या की गई है तथा साक्ष्य मिटाने की नियत से शव को आनन फानन में दफना दिया गया है।

पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज किया और अनुसंधान के में जुट गई अनुसंधान के क्रम में शव का अंत्यपरीक्षण कराना जरूरी था जिसके लिए दंडाधिकारी सह सीओ वीरेंद्र मोहन के नेतृत्व में तरैया थाने की पुलिस शव को कब्र से निकालने के लिए गलिमापुर कब्रिस्तान पर पहुंची।
लेकिन ग्रामीणों द्वारा धार्मिक रीति-रिवाजों का हवाला देते हुए शव को कब्र से निकालने का विरोध किया गया एवं पुलिस को बताया गया कि मायके पक्ष वाले भी के जनाजे में शामिल थे और दफनाने की सारी प्रक्रिया में शामिल थे गांव वालों ने पुलिस को यह भी बताया कि विवाहिता की मृत्यु के पश्चात दोनों पक्षों के जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति में आपसी सहमति कायम की जा चुकी थी उसके बाद ही शव को दफनाने की प्रक्रिया हुई थी।

इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को पुनः सहमति बनाने का समय दिया और सहमति बन जाने पर लिखित सहमति पत्र लेकर आने को कहा अन्यथा एवं रविवार को सुबह आने की बात कह कर पुलिस पदाधिकारी लौट गए।

रविवार को अहले सुबह ग्रामीणों की बैठक हुई एवं मृतका के मायके पक्ष के लोगों से संपर्क साधकर मामले को निपटाने का प्रयास किया गया लेकिन मायके पक्ष के लोग अपनी जिद पर डटे रहे एवं कानूनी प्रक्रिया वापस नहीं लेने की बात साफ-साफ कह दी।

उसके बाद सुबह 10:00 बजे पुलिस मजिस्ट्रेट वीरेंद्र मोहन के नेतृत्व में कब्रिस्तान पर पहुंची एवं कब्र से शव निकालने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई, मामला संवेदनशील होने के वजह से थानाध्यक्ष द्वारा घटना की सूचना वरीय पदाधिकारियों को दे दी गई थी एवं सूचना पाकर डीएसपी इंद्रजीत बैठा मढ़ौरा थाना, अमनौर थाना, मसरख थाना, पानापुर थाना सहित पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

मौके पर ग्रामीणों एवं धर्म गुरुओं द्वारा कब्रिस्तान मे प्रवेश करने वाले लोगों को निहायत ही पाक साफ तरीके से अंदर जाने का आग्रह किया गया एवं धार्मिक भावना का सम्मान करते हुए सभी ने इसका पालन किया एवं चप्पल जूते बाहर उतार कर सभी संबंधित व्यक्ति कब्रिस्तान में पहुंचे एवं ग्रामीणों की निशानदेही पर कब्र को पहचाना उसके बाद कब्र को खोदकर शव को निकाला गया।

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पुलिस को यह जरूर कहा कि कानून का सम्मान करके हम लोगों ने शव निकालने का विरोध तो नहीं किया है लेकिन कब्र से एक बार निकाला गया शव दोबारा इस कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया जाएगा, चुकी मृतका के मायके वालों ने लाश की दुर्गति करने के लिए कब्र से निकलवाया है इसलिए अब तो पोस्टमार्टम के बाद यह शव मायके वालो को ही दिया जाना चाहिए ताकि वह अपने यहां ले जाकर दफनाएं।

शव निकालने के बाद पुलिस द्वारा मौके पर ही पंचनामा बनाकर के अत्यंत कफन के लिए छपरा भेज दिया गया एवं पुलिस बल अपने-अपने गंतव्य की तरफ लौटने लगे इस पुरी प्रक्रिया मैं लगभग चार-पांच घंटे लगे एवं जून की तपती दोपहरी में एक तरफ समस्त पुलिस पदाधिकारी पसीने से तर-ब-तर होकर अपनी ड्यूटी निभा रहे थे वहीं कब्रिस्तान के आसपास सैकड़ों लोगों की भीड़ पुलिस से दूरी बना कर ही सही इस प्रक्रिया को देखने के लिए जमीं हुइ थी जिन्हे बार बार पुलिस बल द्वारा खदेड़ा जा रहा था यही नहीं आसपास के सभी घरों की छतों पर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एवं युवतियां देखी गई जो की उत्सुकता वश इस पूरे प्रकरण को देख रही थीं।

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