मोहम्मद रफी जी पर विशेष

🌹मोहम्मद रफी जी पर विशेष🌹

========Report-Shyam Narayan =========

एक बार किशोर कुमार ने कहा था की रफी साहब की बराबरी मै कर ही नही सकता क्यूंकि मैं गले से गाता हँ और वे दिल से।

आज 31जुलाई को महान गायक मो.रफी जी की 40वीं पुण्यतिथि है।बचपन से ही रफी साहब को संगीत में रुचि थी। इनके पिता इन्हें रोज अपने साथ दुकान में ले जाया करते थे। वहां खाली समय में वहाँ रखे कनस्तरों को बजाकर वे गाया करते थे। इनकी रुचि देखकर पिता ने शास्त्रीय संगीत की तालीम हासिल करने के लिये भेजा। 13 वर्ष की आयु से ही ये दिल्ली एवं लाहौर के रेडियो स्टेशन से गाने लगे। इसी समय एक पंजाबी फिल्म ‘ गुल बलोच ‘में गाने का मौका मिला। बाद में AIR में ही इनकी नौकरी लग गई। वर्ष 1943 में नौकरी छोड़कर फिल्मों में गाने के लिये बम्बई आ गये। यहाँ इन्हें काफी संघर्ष के बाद गायक सहगल साहब के कहने पर संगीतकार नौशाद ने फिल्म ‘ लैला मजनूं ‘(1943) के गाने इनसे गवाये। इस फिल्म में इन्होंने अभिनय भी किया। फिल्म ‘ नौशेरवाने आदिल ‘ में रफी साहब का गाया गीत ‘ ये हसरत थी कि दुनिया में बस दो काम कर जाते, तुम्हारी याद में जीते तुम्हारे गम में मर जाते…….रफी साहब की याद को ताजा करने के लिये आवाज की दुनिया के कद्रदानों के लिये रहती दुनिया तक काफी रहेगा।

रफी साहब सच्चे देशभक्त थे। 1962 में जब चीन ने हमला किया तो वे अपने फौजी भाइयों का हौसला बढ़ाने के लिये चौदह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्गम स्थान ‘ सांगला ‘ में जाकर जोशीले गीत गाकर जवानों में नई स्फूर्ति का संचार किया। रफी साहब ने 36 वर्षो के दौरान लगभग 26000 गाने गाये जो कि एक रिकॉर्ड है। रफी साहब का 31 जुलाई 1980 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जनाब हसरत जयपुरी ने रफी साहब के बारे में कहा है:-

वो सुर के आफताब थे उन जैसा कौन है,

वो लय के माहताब थे उन जैसा कौन है

ये और बात है कि करे कोई भी नकल

अपना जवाब आप थे उन जैसा कौन है

 

🌹 शत शत नमन 🙏

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