नेपाल ने रोका फाटक बदलने का काम, गंडक बराज पर बढ़ा दबाव

नेपाल ने रोका फाटक बदलने का काम, गंडक बराज पर बढ़ा दबाव

 

वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के तीन फाटकों को बदलने और एफ्लैक्स बांध की मरम्मत के लिए नेपाल और भारत के अधिकारियों के साथ हुई चार बैठकों के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। इसके कारण गंडक बराज और उसके बांध पर बाढ़ के समय मंडरा रहे खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है। राहत इतनी मिली कि उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज और बिहार के गोपालगंज, सिवान व छपरा में सिंचाई के लिए पश्चिम नहर में बराज से पानी छोड़ने की अनुमति नेपाली अधिकारियों ने दी। आठ जून की रात इस नहर में पानी छोड़ा गया। नेपाल की ओर से नहर के निरीक्षण के लिए भी आने-जाने की छूट अधिकारियों को देने की बात कही गयी। लेकिन अधिकारी जब निरीक्षण के लिए नेपाल में जाना चाहते है तो नेपाली अधिकारी व पुलिस उनसे कोरोना जांच निगेटिव पाए जाने की रिपोर्ट मांगते हैं।

 

गंडक बराज के कार्यपालक अभियंता जमील अहमद ने सोमवार को बताया कि अलग-अलग समय में अलग-अलग अधिकारी व कर्मी को नहर के निरीक्षण के लिए नेपाल में जाना पड़ता है। लेकिन बॉर्डर पर तैनात पुलिसकर्मी उनसे कोरोना की जांच रिपोर्ट मांग रहे हैं। इसके चलते परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि गंडक बराज के तीन फाटक को बदलने का काम पहले से चल रहा था। ये तीनों फाटक नेपाल की सीमा में है। लेकिन लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया था। इसके बाद नेपाल के अधिकारियों ने नेपाली क्षेत्र में आकर भारतीय ठेकेदारों व उनके कर्मियों को काम करने की अनुमति नहीं दी। चार बार हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला। जबकि तीनों नए फाटक बनाकर भारतीय क्षेत्र में रखे हुए थे।

 

मुजफ्फरपुर के यांत्रिक डिविजन गंडक बराज के अधीक्षण अभियंता केके वर्मा ने बताया था कि फाटक बदलने में समय लगेगा। बरसात का समय शुरू हो गया है। पहाड़ी नदियों का पानी बराज में आता है। ऐसी परिस्थिति में अभी बराज का फाटक बदलना उचित नहीं है। पहले के फाटक भी मजबूत हैं। बराज की सुरक्षा पर किसी प्रकार की समस्या नहीं है। बरसात खत्म होने के बाद तीनों फाटकों को बदल दिया जाएगा।

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