प्लास्टिक कचरों से होने वाले नुकसान पर रिसाइक्लिंग यूनिट की मदद से लगेगी लगाम

प्लास्टिक कचरों से होने वाले नुकसान पर रिसाइक्लिंग यूनिट की मदद से लगेगी लगाम

 

• पर्यावरण को साफ रखने में स्वास्थ्य विभाग भी करेगा सहयोग

• यूएनडीपी के विकास लक्ष्यों में शामिल हैं प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट

• गर्दनीबाग में लगाया गया है प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट

• प्रतिदिन 5 टन प्लास्टिक रिसाइकल करने की है क्षमता

 

 

पटना, 5 जून: कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जहाँ सरकार व स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रबंधन को लेकर भी तैयारियां की जा रही है. वहीं यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम( यूएनडीपी), पटना नगर निगम एवं हिंदुस्तान कोकाकोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कार्य करने में जुटी है . अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन आवश्यक है ताकि बड़े स्तर पर संक्रमण के खतरों की रोकथाम के साथ स्वच्छ पर्यावरण तैयार किया जा सके. इसको लेकर पटना के गर्दनीबाग में पहला प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित की गयी है.

 

पटना निगर निगम, यूएनडीपी व हिंदुस्तान कोकाकोला की साझेदारी के तहत प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम के तहत शुरूआत की गयी है. इस पहल के तहत प्लास्टिक कचरे को अनियंत्रित करने वसे पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जोखिम को कम करना है. इसके तहत प्लास्टिक कचरों के संग्रहण, पृथ्क्करण और उनके रिसाइकलिंग के माध्यम से स्थायी रूप से प्लास्टिक कचरों के प्रबंधन से जुड़े व्यवहार व आदतों को प्रोत्साहित किया जा रहा है. भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 व यूएनडीपी के ससटेंनेबल डेवलपमेंट के लक्ष्यों के अनुरूप इस कार्य को किया जा रहा है.

 

 

गर्दनीबाग में लगाया गया है प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट: 

 

अरविन्द कुमार, कार्यक्रम पदाधिकारी- प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, यूएनडीपी ने बताया यह परियोजना बिहार सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप संसाधनों के उपयोग को बेहतर बनाने के लिए एक सामाजिक-तकनीकी मॉडल (अलगाव, संग्रह और पुनर्चक्रण) को दर्शाती है. प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र गर्दनीबाग में स्थापित किया गया है. इस मशीन की क्षमता 5 टन प्रतिदिन है और इसका संचालन बीते 3 माह से नियमित तौर पर हो रहा है.

 

गाइडलाइन के अनुसार किया जाना है रिसाइक्लिंग:

 

प्लास्टिक कचरों की पहचान कर उसका रिसाइक्लिंग किया जाता है. इसके लिए आवश्यक गाइडलाइन भी दिये गये हैं. गाइडलाइन में कहा गया है कि प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण या रिसाइक्लिंग भारतीय मानक के अनुरूप होगा. गाइडलाइन फॉर रिसाइकलिंग आॅफ प्लास्टिक, IS 14534: 1998 में कहा गया है कि प्लास्टिक कचरे को विभिन्न माध्यमों से प्रोसेसिंग कर PWM नियम 2016 और 2018 के अनुसार उसका पुर्ननवीनीकरण किया जाये.

 

 

 

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में ये हैं व्यापक सुविधाएं: 

 

• महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल

• संक्रमण की रोकथाम एवं मामूली चोटों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य की उपलब्धता

• प्रजनन स्वास्थ्य की देखभाल

• उचित वेतन व कार्य में समानता

• साफ पानी की उपलब्धता

• अलग अलग शौचालय की सुविधा

 

महिलाओं के लिए होगी विशेष सुविधा:

 

अनौपचारिक रूप से कचरा बीनने वाली महिलाओं को इस कार्यक्रम के तहत शामिल करने की पहल की जा रही है. साथ ही गर्दनीबाग स्थित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में महिलाओं की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. इसमें कार्य करने वाले महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर एवं महिलाओं की पोषण एवं गर्भावस्था की समुचित देखभाल के साथ माहवारी स्वच्छता सुनिश्चित कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही लिंग आधारित हिंसा को रोकने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा.

 

इन योजनाओं की सुविधा: 

 

यूएनडीपी, पटना नगर निगम एवं एचसीसीबी के सहयोग से पटना में कचरा बीनने वालों को चिन्हित किया गया है एवं उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनके बैंक अकाउंट भी खोले गए हैं. साथ ही उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने की भी कोशिश की जा रही है. जिसमें आयुष्मान भारत योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जेंडर एक्शन प्लान एवं अटल पेंशन योजना जैसे अन्य कार्यक्रम शामिल हैं.

error: Content is protected !!