फाइलेरिया से बचाव के लिए प्रत्येक व्यक्ति को दवा का सेवन करना आवश्यक: डीएम

• जिलाधिकारी ने एमडीएम कार्यक्रम का किया शुभारंभ

• आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका घर-घर जाकर खिलाएंगी दवा

• 41 लाख 20 हजार 463 लाभार्थियों को खिलायी जायेगी दवा

• 14 दिनों तक चलेगा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम

छपरा। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को समाहरणालय परिसर में जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे के द्वारा किया गया। जिलाधिकारी ने दवा खिलाकर कार्यक्रम की शुरूआत की।

इस मौके पर उन्होने कहा कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है। इससे बचाव के लिए प्रत्येक पात्र व्यक्ति को एमडीए दवा का सेवन करना जरूरी है। फाइलेरिया से बचाव हीं इसका उपचार है।जागरूकता और सावधानी से हीं इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए एमडीए के दौरान दवा का सेवन जरूरी है। फाइलेरिया से बचाव के लिए एमडीए सार्थक सिद्ध होगा। घर के सभी सदस्यों को उनके उम्र के अनुसार गोलियां दी जाएंगी और सभी लोगों को अपने सामने ही दवा खिलाना होगा। गर्भवती महिलाओं, दो साल से कम उम्र के बच्चों और किसी गंभीर रोग होने पर फाइलेरिया की दवा नहीं खिलानी है। दो से पांच वर्ष तक के बच्चों को डीईसी एक और अल्बेंडाजोल की एक गोली देनी है। पांच से 15 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली देनी है। वहीं, 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन व अल्बेंडाजोल की एक गोली देनी है। अल्बेंडाजोल की गोली हमेशा चबा कर खाएं और खाली पेट कभी भी नहीं खाएं। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. जेपी सुकुमार, डीएमओ डॉ. दिलीप कुमार सिंह, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीपीसी रमेश चंद्र कुमार, भीबीडीसी प्रतिकेश कुमार, केयर डीपीओ भीएल आदित्य कुमार, पीसीआई आरएमसी संजय यादव, सीफार के डीसी गनपत आर्यन, रितेश राय समेत अन्य मौजूद थे।

 

41 लाख 20 हजार 463 लाभार्थियों को खिलायी जायेगी दवा:

सिविल सर्जन डॉ. जेपी सुकुमार ने बताया कि जिले में 41 लाख 20 हजार 463 लाभार्थियों को एमडीए का दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 1921 टीम बनाया गया है। निगरानी के लिए 189 सुपरवाइजरों को तैनात किया गया है। फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक गंभीर संक्रामक बीमारी है जिसे आमतौर पर हाथी पांव भी कहा जाता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है। फाइलेरिया के प्रमुख लक्षण हाथ और पैर या हाइड्रोसिल (अण्डकोष) में सूजन का होना होता है। प्रारंभिक अवस्था में इसकी पुष्टि होने के बाद जरूरी दवा सेवन से इसे रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है।

 

जेल और महिला अल्पावास गृह में भी खिलायी जायेगी दवा:

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि इस अभियान के दौरान इस बार विभाग के द्वारा विशेष पहल की गयी है। इस बार जेल में बंद कैदियों और महिला अल्पावास गृह में भी दवा खिलायी जायेगी। इसको लेकर माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके साथ बाल सुधार गृह में भी दवा खिलायी जायेगी। डीएमओ ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यह दवा नहीं दी जायेगी। कार्यक्रम में छूटे हुए घरों में आशा कर्मियों द्वारा पुनः भ्रमण कर दवा खिलाई जाएगी।

 

जागरूकता रथ को किया गया रवाना:

जिलाधिकारी डॉ. नीलेश रामचंद्र देवरे के द्वारा हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रथ को रवाना किया गया। शहरी क्षेत्र में जागरूकता के लिए दो रथ चलाया जा रहा है। जो गली-मुहल्ला और चौक-चौराहों पर ऑडियों के माध्यम से लोगों को फाईलेरिया से बचाव तथा दवा सेवन कार्यक्रम के बारे में जानकारी देगी। इसके साथ विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम सभी विभागों के साथ साथ सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया, पीसीआई, सीफार के द्वारा सहयोग किया जा रहा है।

error: Content is protected !!